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रंगीन पैकेटों में चमकीली परत चढ़ा कर और विज्ञापनों के सहारे धड़ल्ले से जीवन

मात्र एक चेतावनी प्रकाशित कर देने भर से सरकार और समाज की जिम्मेदारी पूरी..

 

 

लाखों टूटते-बिखरते परिवारों, दम तोड़ते सपनों और खिलने से पहले ही मुरझा जाने वाले चेहरों की अनकही दास्तान..

जिस देश में बड़े-बड़े फिल्मी स्टार वह क्रिकेटर युवाओं को नशे का आदि बनाने का काम कर रहे हैं तो वह देश किसी और जाएगा यह हम स्वयं समझ सकते हैं आज यह ऐसा चलन चल चुका है की हर जगह तंबाकू का प्रयोग होता हुआ नजर आ रहा है! देश में हर साल तंबाकू उत्पाद लगभग हर साल तंबाकू उत्पाद लोगों की मौत की वजह बनते हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों टूटते-बिखरते परिवारों, दम तोड़ते सपनों और खिलने से पहले ही मुरझा जाने वाले चेहरों की अनकही दास्तान हैं! हम हर साल ऐसे मानव संसाधन खो रहे हैं, जो राष्ट्र निर्माण और विकास में भागीदार हो सकते थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तंबाकू की बिक्री से व्यवसायियों को होने वाला मुनाफा और सरकारों को मिलने वाला राजस्व लाखों जिंदगियों से अधिक कीमती है? क्या तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर मात्र एक चेतावनी प्रकाशित कर देने भर से सरकार और समाज की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? यह एक ऐसा जहर है, जिसे रंगीन पैकेटों में चमकीली परत चढ़ा कर और विज्ञापनों के सहारे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। तंबाकू नियंत्रण के तमाम नियम-कानून कागजों से बाहर झांक ही नहीं पाते हैं। हर गली, नुक्कड़ और हर उम्र वालों की लिए सर्वसुलभये उत्पाद केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।लाख लोगों की मौत की वजह बनते हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों टूटते-बिखरते परिवारों, दम तोड़ते सपनों और खिलने से पहले ही मुरझा जाने वाले चेहरों की अनकही दास्तान हैं। हम हर साल ऐसे मानव संसाधन खो रहे हैं, जो राष्ट्र निर्माण और विकास में भागीदार हो सकते थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तंबाकू की बिक्री से व्यवसायियों को होने वाला मुनाफा और सरकारों को मिलने वाला राजस्व लाखों जिंदगियों से अधिक कीमती है? क्या तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर मात्र एक चेतावनी प्रकाशित कर देने भर से सरकार और समाज की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? यह एक ऐसा जहर है, जिसे रंगीन पैकेटों में चमकीली परत चढ़ा कर और विज्ञापनों के सहारे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। तंबाकू नियंत्रण के तमाम नियम-कानून कागजों से बाहर झांक ही नहीं पाते हैं। हर गली, नुक्कड़ और हर उम्र वालों की लिए सर्वसुलभये उत्पाद केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

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