
प्रधानी चुनाव की रंजिश में हुए हत्याकांड के दोषी पूर्व प्रधान समेत दो को फांसी की सज़ा
मुजफ्फरनगर : एडीजे/फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपराध को विरल से विरलतम माना, एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया
हथियार नहीं… लोकतंत्र का आधार मतपत्र : अदालत
मुजफ्फरनगर। प्रधानी के चुनाव की रंजिश में 16 साल पहले हुई मांडी गांव के राजबीर सिंह (60) की हत्या में पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और प्रधान पद के प्रत्याशी रहे को सोमवार को फांसी की सजा सुनाई गई।
सहदेव उर्फ पप्पू राजबीर सिंह
एडीजे/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने अपराध को विरल से विरलतम मानते हुए एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। हत्या के दो आरोपी पहले ही पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।
तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव के किसान राजबीर सिंह की 24
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 55 पेज के अपने फैसले में लिखा कि लोकतंत्र का आधार मतपत्र है, न कि हथियार। चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक परिणाम है। लोकतंत्र की विजय मतपत्र से होती है, रक्तपात से नहीं। यह न्यायालय आशा करता है कि भविष्य में पंचायत चुनाव ऐसे वातावरण में संपन्न हो, जहां मतभेद विचारों तक सीमित रहे, वैमनस्य में परिवर्तित न हो और जनादेश का सम्मान हिंसा से नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन से किया जाए।
अगस्त 2010 की सुबह करीब सवा सात बजे ट्यूबवेल के पास चार हमलावरों ने पांच गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। राजवीर के बेटे वादी प्रदीप कुमार ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ
प्रमोद कुमार
सहदेव उर्फ पप्पू
दोना फैक्टरी से चर्चा में आया राजबीर का पौत्र अंकित मांडी गांव के राजबीर सिंह का परिवार इन दिनों दोना फैक्टरी में मजदूरों को बंधक बनाने के मामले में कानून के शिकंजे में है। बेटा प्रदीप और पौत्र अंकित बालियान जेल में है। दूसरे बेटे विपिन पर भी अंकित को सरेंडर करने की साजिश रचने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
प्राथमिकी दर्ज कराई। छह सितंबर 2010 को वादी ने तत्कालीन एसएसपी से मिलकर शपथपत्र दिया कि प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू ने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर उनके
थाने से गायब हुआ माल, जांच के लिए चिट्ठी : प्रकरण में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई। शव के पास से 32 बोर के चार खोखे बरामद हुए थे लेकिन थाने से गायब हो गए। यह महत्वपूर्ण साक्ष्य थे। दोषियों की थाने तक सांठगांठ मानी गई। अदालत ने प्रकरण की जांच के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है। मतदान से समाप्त हों मतभेद :
पिता की हत्या की है।
पुलिस की जांच में सोरम के विपिन शर्मा उर्फ पप्पन शर्मा और वरवाला के अमित की संलिप्तता मिली। बरवाला में 17 जनवरी 2011 की रात दोनों अपराधी
प्रमोद नहीं चाहता था उसके खिलाफ कोई चुनाव लड़े : साल 2000 में प्रमोद कुमार प्रधान पद का पहला चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। 2005 में वह प्रधान चुना गया। इस बीच राजबीर सिंह ने 2010 के चुनाव की तैयारी की। यहीं से इनमें रंजिश शुरू हो गई। प्रमोद नहीं चाहता था कि कोई उसके सामने चुनाव लड़े। 2005 में सहदेव ने भी मतदान से पहले प्रमोद को ही समर्थन दे दिया था। राजबीर की हत्या के बाद सीट महिला के लिए आरक्षित होने पर उसकी पत्नी सुदेश बाला प्रधान बनी। सजायाफ्ता प्रमोद कुमार ने पिछले 26 साल में चार चुनाव लड़े हैं। प्रमोद कुमार अर्जुन अवार्डी एएसपी फिरोजाबाद अनुज चौधरी का ममेरा भाई है।
पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। इसके बाद पुलिस ने अभियुक्त प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अभियुक्तों पर 30 जून को अदालत ने दोष सिद्ध किया था।