रोहाना टोल प्लाजा पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले की कुछ गाड़ियों को पुलिस ने रोका हंगामा

टोल पर रुका काफिला तो भड़के सांसद चंद्रशेखर आजाद, बोले- ‘निर्दोष जेल न जाए, दोषी किसी कीमत पर न बचे’मुजफ्फरनगर के रोहाना टोल प्लाजा पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले की कुछ गाड़ियों को पुलिस
रोके जाने पर हंगामा हो गया. इस दौरान चंद्रशेखर आजाद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई.
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद स्थित नगर कोतवाली क्षेत्र के रोहाना टोल प्लाजा पर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद अपने काफिले के साथ सहारनपुर से मेरठ की ओर बढ़ रहे थे. इस दौरान पुलिस द्वारा काफिले की गाड़ियों को रोके जाने पर सांसद और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली.टोल प्लाजा पर पुलिस और सांसद में तीखी बहस
मिली जानकारी के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद की निजी गाड़ी तो टोल प्लाजा से शांतिपूर्वक निकल गई, लेकिन पीछे आ रहीं उनके काफिले की कुछ गाड़ियों को मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने रोक लिया. अपनी गाड़ियों को रोके जाने से नाराज चंद्रशेखर आजाद तुरंत वाहन से नीचे उतरे और पुलिसकर्मियों के पास पहुंचे.
इस दौरान माहौल काफी गरमा गया. घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह सांसद के सामने हाथ जोड़े खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि चंद्रशेखर आजाद उन्हें नियम-कायदों और लोकतांत्रिक व्यवस्था का पाठ पढ़ा रहे हैं. बहस के बीच इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह यह कहते सुने गए कि मैं इंस्पेक्टर हूं और इंस्पेक्टर ही रहूंगा… गाली नहीं दी थी किसी को, हाथ जोड़ रहा हूं. इस हंगामे और नोकझोंक के बाद चंद्रशेखर आजाद का काफिला आखिरकार मेरठ की ओर रवाना हो गया.
मेरठ एसएसपी के व्यवहार पर उठाए सवाल
चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया से बातचीत में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पर प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मेरठ में जो कुछ भी हुआ, उससे पूरा देश वाकिफ है और वह किसी से छिपकर नहीं बल्कि सबको बताकर मेरठ जा रहे हैं.
सांसद ने एसएसपी और डीएम से मुलाकात करने की बात कहते हुए कई तीखे सवाल दागे. चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि जिले के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी ने सड़क किसी के बाप की नहीं है, गंदगी कर दी सालो ने जैसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, जो बेहद चिंताजनक है.
कमजोर और डरावना व्यवहार
उन्होंने कहा कि वहां प्रदर्शनकारियों के पास कोई हथियार या डंडे नहीं थे. अगर कोई अधिकारी सिर्फ नारेबाजी से डर जाता है, तो इस बात की क्या गारंटी है कि वह कल को गोली नहीं चला देगा? ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
निर्दोष जेल न जाए और दोषी बचे नहीं
चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी भी निर्दोष को बचाना और दोषी को सजा दिलाना है. पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर पुलिस का व्यवहार ही ऐसा रहेगा, तो पीड़ित परिवार को उनकी जांच (इन्वेस्टिगेशन) पर भरोसा कैसे होगा? आखिर पुलिस किसे रोकने की कोशिश कर रही है और क्या छुपाना चाहती है, इसका जवाब खुद पुलिस को देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी पीड़ा सुनेंगे. यदि बातचीत से रास्ता नहीं निकला, तो आंदोलन और संघर्ष का रास्ता अपनाया जाएगा.
आत्महत्या का किया विरोध
मेरठ मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर बोलते हुए चंद्रशेखर आजाद ने लोगों से धैर्य रखने की अपील की और आत्महत्या जैसे कदम का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि आत्महत्या कोई विकल्प नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए. देश में अदालतें खुली हैं और बड़े अधिकारी भी हैं. जीवन एक ही बार मिलता है, अगर आप ही मर जाओगे तो आपके हक की लड़ाई कौन लड़ेगा? सांसद ने अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर पुलिस और प्रशासन समय रहते पीड़ितों की बात सुन लेता, तो आज यह नौबत ही नहीं आती और न ही लोगों को जेल जाना पड़ता. फिलहाल, पुलिस प्रशासन मुस्तैद है और चंद्रशेखर के मेरठ दौरे को लेकर सतर्कता बरती जा रही है.
