अन्ना हजारे की टीम फिर सक्रिय मोड में, उत्तराखंड से संगठन विस्तार का आगाज़
राष्ट्रीय लोक आंदोलन की बैठक में सामाजिक एकजुटता, नशा, युवाओं, भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर व्यापक मंथन

देहरादून, 23 मई। देश में जनआंदोलनों, भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों और सामाजिक सरोकारों को नई दिशा देने वाले अन्ना हजारे की टीम एक बार फिर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राष्ट्रीय लोक आंदोलन न्यास (टीम अन्ना हजारे) द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाने, संगठन विस्तार, युवाओं के भविष्य, बढ़ते नशे, सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार, लोकायुक्त व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया। बैठक में महाराष्ट्र से अन्ना हजारे जी द्वारा भेजी गई टीम ने प्रतिभाग किया, जिसमें राष्ट्रीय लोक आंदोलन की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना इनामदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कमल टावरी (भाई कमलानंद जी महाराज) सहित कई वरिष्ठ समाजसेवी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बैठक की शुरुआत अन्ना हजारे जी के संदेश — “मैं रहूँ या ना रहूँ, मशाल जलती रहनी चाहिए” के साथ हुई, जिसने उपस्थित लोगों में सामाजिक बदलाव और जनहित के संघर्ष को लेकर नई ऊर्जा का संचार किया। बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय लोक आंदोलन की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना इनामदार ने अन्ना हजारे जी के सिद्धांतों और सामाजिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज देश को मूल्य आधारित सामाजिक आंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे का जीवन केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता, निष्कलंक जनसेवा और राष्ट्रहित का प्रतीक है।
कल्पना इनामदार ने अन्ना हजारे जी के पांच मूल सिद्धांतों— शुद्ध आचार, शुद्ध विचार, निष्कलंक जीवन, त्याग की भावना और अपमान से विचलित न होना — को सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद बताते हुए कहा कि कोई भी संघर्ष तभी सफल होता है जब व्यक्ति का चरित्र और विचार मजबूत हों। उन्होंने कहा कि समाज को बदलने के लिए पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है और यही अन्ना हजारे की सबसे बड़ी सीख रही है।
इस दौरान कल्पना इनामदार ने बताया कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय लोक आंदोलन के संगठन विस्तार का कार्य भोपाल सिंह चौधरी द्वारा किया जाएगा, जो प्रदेशभर में विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं और समाजसेवियों को जोड़ने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों पर समाज की साझा शक्ति को मजबूत करना है।
बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रभारी भोपाल सिंह चौधरी ने प्रदेश के सभी सामाजिक, युवा, किसान, कर्मचारी एवं जनसरोकारों से जुड़े संगठनों से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद बना था, लेकिन आज राज्य निर्माण की मूल भावना को बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब समय केवल राज्य बनने का जश्न मनाने का नहीं, बल्कि “राज्य बचाने” के लिए एक मंच पर आने का है।
भोपाल सिंह चौधरी ने कहा कि आज उत्तराखंड नशाखोरी, बेरोजगारी, पलायन, सामाजिक असंतुलन और जनसमस्याओं जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में यदि सामाजिक संगठन बिखरे रहेंगे तो प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन यदि सभी संगठन एकमुट्ठ होकर कार्य करें, तो उत्तराखंड को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे जी का नेतृत्व ईमानदारी, जनसंघर्ष और राष्ट्रहित का प्रतीक रहा है, इसलिए प्रदेश के सभी संगठनों को उनके सिद्धांतों के साथ एक मंच पर आकर समाजहित में कार्य करना चाहिए।
बैठक में उपस्थित पूर्व अपर सचिव जीवन जोशी ने लोकपाल, लोकायुक्त, प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब जनता और सामाजिक संगठन सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन ने देश में जवाबदेही और पारदर्शिता की बहस को नई दिशा दी थी, जिसे और मजबूत करने की आवश्यकता है।
वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कमल टावरी (भाई कमलानंद जी महाराज) ने संगठन विस्तार को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक आंदोलन को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक चेतना, नैतिकता और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर ही एक मजबूत सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।
राष्ट्रीय लोक आंदोलन के कुमाऊं मंडल अध्यक्ष पीयूष जोशी ने युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि आज का युवा तेजी से दिशाहीन होता जा रहा है और उसे सकारात्मक दिशा देने वाले जिम्मेदार संगठनों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में नशे का बढ़ता कारोबार युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहा है, जबकि इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमों और दबाव की राजनीति का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अन्ना हजारे जी से ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की मांग करते हुए देशभर के समाजसेवियों से अपील की कि किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता पर अन्याय होने की स्थिति में सभी लोग एकजुट होकर उसके समर्थन में खड़े हों।
इस दौरान देहरादून जिला अध्यक्ष जसपाल चौहान ने राजधानी क्षेत्र में बढ़ते नशे के कारोबार और युवाओं की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर सामाजिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ किसान नेता एवं भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने भी अपने संबोधन में किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश और उत्तराखंड दोनों ही स्तर पर किसान, मजदूर और आम आदमी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन उनकी आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि सामाजिक संगठन केवल अपने सीमित दायरों तक न रहें, बल्कि किसानों, युवाओं, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को लेकर साझा जनआंदोलन तैयार करें। शाह आलम ने कहा कि उत्तराखंड को बचाने के लिए सामाजिक और किसान संगठनों की एकजुटता समय की मांग है, और यदि समाज के विभिन्न वर्ग एक मंच पर आ जाएं तो निश्चित रूप से जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक आंदोलन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि सामाजिक संगठनों की एकजुटता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भी अपने विचार रखते हुए जनहित, सामाजिक न्याय, युवाओं के सशक्तिकरण, नशामुक्ति और संगठनात्मक एकजुटता पर बल दिया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद धर्मोज, गीता चौधरी, डॉ. मुकुल, डॉ. सर्वेश कुमार गोद, पीसी थप्पडयाल, मोहन सिंह रावत, सुशील चमोली, सुरेश कुमार, स्वप्निल सिंह, डॉ. सुयश मिश्रा, नेहा चौहान, गीत, अनिल कुमार, मनीष कुमार, पूजा चमोली, संजय एचएम, प्रियंका, सुमित कुमार, गिरीश ढोलकोटी, निशांत सिंह, रवि, भोपाल सैनी, फरमान राजपूत, मुनव्वर राणा सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में यह स्पष्ट संकेत दिए गए कि राष्ट्रीय लोक आंदोलन आने वाले समय में उत्तराखंड सहित देशभर में संगठन विस्तार को गति देगा तथा सामाजिक सरोकारों, युवाओं, नशामुक्ति, जनजवाबदेही और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएगा। बैठक के दौरान अन्ना हजारे जी का संदेश “मैं रहूँ या ना रहूँ, मशाल जलती रहनी चाहिए” चर्चा का केंद्र बना रहा और उपस्थित लोगों ने समाजहित में साझा संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


