पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक और मुजफ्फरनगर के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे दावा शेरपा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद
मुजफ्फरनगर के पुलिस कप्तान रहे दावा शेरपा हंसमुख और मिलनसार थे उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक और मुजफ्फरनगर के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे दावा शेरपा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखदऔर भावुक कर देने वाला है। उनके निधन से पुलिस सेवा, प्रशासनिक जगत और उन लोगों को गहरा आघात पहुंचा है जिन्होंने उन्हें एक कुशल, ईमानदार, संवेदनशील और जनप्रिय अधिकारी के रूप में जाना।
मुजफ्फरनगर की धरती से उनका विशेष लगाव रहा और जिले की जनता के दिलों में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिकेरा के बाद जब उन्होंने जिले की कमान संभाली, तब अपराध और अपराधियों के खिलाफ उनका रुख भी बेहद सख्त था। कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके कार्यकाल में पुलिस मुठभेड़ों के दौरान एक दर्जन से अधिक कुख्यात अपराधी मारे गए। अपराधियों के मन में कानून का भय और आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का विश्वास स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
लेकिन दावा शेरपा केवल एक सख्त पुलिस अधिकारी ही नहीं थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे जनता से सीधे संवाद स्थापित करते थे। उनकी सादगी, सहजता और विनम्र व्यवहार लोगों को अपना बना लेता था। आम नागरिक हो या कोई कर्मचारी, हर व्यक्ति उनसे बेझिझक अपनी बात कह सकता था। यही कारण था कि वे जनता के बीच लोकप्रिय रहे और आज भी उनकी यादें लोगों के दिलों में जीवित हैं।
उनके कार्यकाल के दौरान तत्कालीन कद्दावर नेता मुनव्वर हसन के साथ एक तबादले को लेकर मतभेद की चर्चा भी उस समय खूब हुई थी। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उनका स्थानांतरण कर दिया गया। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने कर्तव्य और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
वर्ष 2008 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेकर अपने गृह क्षेत्र दार्जिलिंग का रुख किया और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने का निर्णय लिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी भूमिका तलाशने लगे। चुनाव लड़ने की तैयारी भी हुई, लेकिन वीआरएस को अंतिम स्वीकृति न मिलने के कारण परिस्थितियां बदल गईं। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता जसवंत सिंह के चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें विजय दिलाने में योगदान दिया। बाद में वे पुनः पुलिस सेवा में लौटे और अपने अनुभव तथा कार्यकुशलता से विभाग को नई ऊर्जा प्रदान की।
दावा शेरपा जी ने अपने लंबे सेवाकाल में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए पुलिस प्रशासनिक दक्षता और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। वर्ष 2022 में वे अपर पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे समाज और लोगों से जुड़े रहे।
जीवन का यह सफर अचानक उस समय थम गया जब वे अपने पुत्र मिंगा शेरपा, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं, के पास जम्मू कश्मीर गए हुए थे। वहीं उनका निधन हो गया। यह समाचार उन सभी लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक है जिन्होंने उन्हें करीब से देखा, समझा और उनके साथ कार्य किया।
एक लेखक और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में मेरा उनसे विशेष संबंध रहा। मेरी पुस्तक “पुलिस पब्लिक रिलेशन” के लिए उन्होंने मुझे विस्तृत साक्षात्कार दिया था। उनकी स्पष्टवादिता, अनुभव और पुलिस-जन संबंधों को लेकर उनके विचार आज भी स्मृतियों में सुरक्षित हैं। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद भी उनका जिले में आना हुआ था और उस दौरान भी उन्होंने लोगों से आत्मीयता के साथ संवाद स्थापित किया था। इतने ऊंचे पद पर पहुंचने के बावजूद उनमें कभी अहंकार नहीं आया। यही गुण उन्हें विशिष्ट बनाता था।
आज जब हम उन्हें याद करते हैं तो केवल एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान को याद करते हैं जिसने अपने कर्तव्य, साहस, सादगी और मानवीय संवेदनाओं से लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बनाया। मुजफ्फरनगर की जनता, पुलिस विभाग और उन्हें जानने वाले सभी लोग उनकी सेवाओं और योगदान को कभी नहीं भूल पाएंगे।
भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ।