
मुजफ्फरनगर/बुढ़ाना संजीवनी ग्लोबल वेलफेयर फाउंडेशन के तत्वावधान में रांची, झारखंड में आयोजित एक दिवसीय नेशनल आयुष कॉन्फ्रेंस एंड अवार्ड्स 2026 दो अगस्त दिन रविवार को
सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयुष चिकित्सा पद्धतियों के विकास और मानव कल्याण को समर्पित इस महाकुंभ में देशभर के विख्यात चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सुधीर कुमार (आई.सी. एम.आर. रिसर्च हेड) धनबाद झारखंड रहे, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो पाने पर भारत सरकार आयुष मंत्रालय के सी.सी.आर.एच. (CCRH) सदस्य डॉ. ए. के. द्विवेदी (इंदौर, मध्य प्रदेश) एवं डॉ. कमलेंद्र त्यागी (जयपुर, राजस्थान) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने तकनीक के माध्यम से जुड़कर सभी आगंतुकों एवं आयोजकों को कार्यक्रम की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रदान कीं। सम्मेलन के दौरान पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के आधुनिकीकरण और वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए मुख्य वक्ताओं ने अपने
शोध और विचार साझा किए, जिनमें मुख्यरूप से सर्व मनोकामना ऋद्धि सिद्धि न्यास मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष आचार्य डॉ कपिल मलिक ने *पीसीओडी और आयुर्वेद* नामक विषय पर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि पीसीओडी महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल विकार है। जिसमें अंडाशय सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता, इस स्थिति में ओवरी में छोटे छोटे सिस्ट (गांठें) बन जाती है, जिससे मासिकधर्म अनियमित हो जाता है और शरीर में हार्मोन असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। आयुर्वेद पीसीओडी को आर्तव दोष मानता है जिसका मूल कारण कफ दोष की अधिक वृद्धि, वात दोष का असंतुलन और कमजोर पाचन का होना है। जिससे कि स्त्री प्रजनन तंत्र प्रभावित हो जाता है। इस प्रकार से डॉ आचार्य ने आयुर्वेदिक तथ्यों का हवाला देते हुए पीसीओडी लक्षण, कारण, उपाय, जीवन शैली , विभिन्न प्रकार का भोजन छादन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कॉन्फ्रेंस में
होम्योपैथी से डॉ. शिबान्शू शेखर आचार्य (कोलकाता, पश्चिम बंगाल),
आयुर्वेद से डॉ. नितिन उर्मलिया (इंदौर, मध्य प्रदेश) एवं डॉ मो0 फिरोज (सहारनपुर , यूपी)
यूनानी से डॉ. गुलफाम असगर फातमी (पटना, बिहार),
योग से बी. एस. नरसिम्हा प्रसाद (मैसूर, कर्नाटक),
डॉ. मोहम्मद शफी (कोझीकोड, केरल) और गरिमा पल्लवी (डायटिशियन, पटना, बिहार)आदि चिकित्सकों ने आयुष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सभी को अपनाने पर जोर दिया। इस गरिमामयी अवसर पर चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले देशभर के 100 आयुष चिकित्सकों को प्रतिष्ठित ‘आयुष विभूषण अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया। जिनमें आचार्य डॉ कपिल मलिक को भी आयुष एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. पंकज कुमार ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संजीवनी ग्लोबल वेलफेयर फाउंडेशन के फाउंडर ट्रस्टी श्रवण शुक्ला, परियोजना प्रबंधक आशीष हेमकर, परियोजना समन्वयक श्यामल शर्मा, हेड ऑफ डिपार्टमेंट (बिहार) डॉ. अखिलेश कुमार और राज्य परियोजना समन्वयक कन्हैया झा ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के फाउंडर ट्रस्टी श्रवण शुक्ला ने सभी अतिथियों का आभार जताते हुए कहा, “रांची की पावन धरती पर जुटे इन महान विचारकों की उपस्थिति हमारे लिए गौरव का विषय है। यहाँ साझा किए गए शोध निश्चित रूप से आयुष पद्धतियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।”
